रमेश
एक ऐसा इंसान था
जिसे दुनिया की हर छोटी-बड़ी समस्या का
समाधान मालूम था। देश की
राजनीति हो, क्रिकेट का
मैच हो, पड़ोसी का
झगड़ा हो या फिर
मोबाइल का नेटवर्क न
आना, हर विषय पर
उसकी अपनी एक अलग
राय होती थी। लेकिन
उसकी जिंदगी में एक ऐसी
समस्या थी जिसका समाधान
आज तक कोई नहीं
खोज पाया था। वह
समस्या थी – नहाना!
रमेश
के लिए नहाना किसी
कठिन परीक्षा से कम नहीं
था।
वैसे
तो रमेश रोज सुबह
उठता था, लेकिन नहाने
के नाम पर उसकी
सुबह, दोपहर में और दोपहर
शाम में बदल जाती
थी। उसकी माँ धनलक्ष्मी
अक्सर उससे कहती थी,
"रमेश बेटा, तू सुबह उठकर,
सबसे पहले नहा लिया
कर।"
रमेश
बड़े आत्मविश्वास से जवाब देता,
"अरे माँ” नहाना कोई
छोटी-मोटी जिम्मेदारी है
क्या? इसके लिए सही
समय, सही मौसम और
सही मानसिक स्थिति होनी चाहिए।"
धनलक्ष्मी
माथा पकड़कर बैठ जाती।
एक दिन सुबह-सुबह
धनलक्ष्मी ने रमेश को
आवाज लगाई, "रमेश, आज रविवार है।
छुट्टी का दिन है।
आराम से नहा ले।"
रमेश
बिस्तर पर लेटे-लेटे
बोला, "आज तो मौसम
बहुत ठंडा है। ठंड
में नहाने से सर्दी-जुकाम
हो सकता है। डॉक्टर
भी कहते हैं कि
स्वास्थ्य का ध्यान रखना
चाहिए।"
धनलक्ष्मी
ने खिड़की खोलकर कहा, "बाहर 35 डिग्री तापमान है। गर्मी से
लोग परेशान हैं और तुम्हें
ठंड लग रही है!"
रमेश
ने तुरंत चादर अपने ऊपर
खींच ली और बोला,
"यही तो समस्या है!
बाहर गर्मी है, लेकिन मेरे
शरीर का तापमान अलग
है।"
माँ
ने गुस्से में कहा, "तेरे
शरीर का तापमान नहीं,
तेरी नहाने की इच्छा ठंडी
पड़ गई है!"
रमेश
ने बात को हँसी
में उड़ाते हुए कहा, "माँ,
आप मेरी भावनाओं को
कभी नहीं समझ पाओगी।"
नहाने
से बचने के बहाने
रमेश
के पास नहाने से
बचने के बहानों की
पूरी सूची थी।
सोमवार
को कहता, "आज सोमवार है,
सप्ताह की शुरुआत है।
आज मानसिक तैयारी करता हूँ, कल
से पक्का नहाऊँगा।"
मंगलवार
को कहता, "मंगलवार को बाल नहीं
धोने चाहिए।"
बुधवार
को कहता, "आज बहुत काम
है। नहाने में समय बर्बाद
नहीं कर सकता।"
गुरुवार
को कहता, "आज पूजा-पाठ
का दिन है। मन
साफ होना चाहिए, शरीर
तो बाद में भी
साफ हो जाएगा।"
शुक्रवार
को कहता, "कल शनिवार है।
कल मैं आराम से
नहा लूँगा।"
शनिवार
को कहता, "आज तो छुट्टी
है। छुट्टी का मतलब आराम
करना होता है, न
कि पानी में समय
बिताना।"
और रविवार को उसका सबसे
लोकप्रिय बहाना होता, "कल से नई
शुरुआत!"
इस तरह रमेश की
जिंदगी में हर दिन
नया बहाना और नहाने का
कार्यक्रम हमेशा स्थगित रहता था।
माँ
ने ढूँढा नहाने का नया तरीका
एक दिन माँ ने
ठान लिया कि अब
रमेश को नहाने की
आदत डालकर ही रहेगी।
उसने
सुबह ही बाथरूम में
पानी भर दिया, साबुन,
शैम्पू और तौलिया रख
दिया। यहाँ तक कि
रमेश के पसंदीदा गाने
भी मोबाइल पर चला दिए।
फिर
वह रमेश के पास
आई और बोली, "रमेश
सुन, आज तेरे लिए
बाथरूम में सारी व्यवस्था
कर दी है। उठ
और झट्ट से नहा
ले।"
रमेश
ने मोबाइल देखते हुए कहा, "अरे
वाह! इतनी तैयारी क्यों?
क्या घर में कोई
वीआईपी आने वाला है?"
माँ
बोली, "हाँ, एक वीआईपी
आने वाला है।"
रमेश
घबराकर उठ बैठा, "कौन?
मुख्यमंत्री या कोई बड़ा
अधिकारी?"
माँ
मुस्कुराई और बोली, "नहीं,
तेरे नहाने की इच्छा! उसे
आज घर बुलाया है।"
रमेश
ने माथा खुजलाया और
कहा, "देखो माँ, मजाक
अपनी जगह है, लेकिन
बिना इच्छा के नहाना लोकतंत्र
के खिलाफ है।"
माँ
ने जवाब दिया, "और
बिना नहाए घर में
घूमना स्वच्छता अभियान के खिलाफ है!"
नहाने
का ऐतिहासिक दिन
आखिरकार
एक दिन ऐसा आया
जब रमेश को मजबूरी
में नहाना पड़ा।
उसके
पुराने दोस्त प्रभास का फोन आया।
"अरे
रमेश! आज शाम को
मेरे घर पार्टी है।
सभी पुराने दोस्त आ रहे हैं।
तुम भी जरूर आना।"
रमेश
खुशी से उछल पड़ा।
पार्टी का नाम सुनते
ही उसकी सारी थकान
गायब हो गई।
लेकिन
तभी माँ ने कहा,
"एक मिनट! पार्टी में जाने से
पहले नहाना जरूरी है।"
रमेश
ने तुरंत कहा, "अरे, मैं तो
वैसे भी नहाने ही
वाला था।"
धनलक्ष्मी
ने आश्चर्य से पूछा, "सच
में?"
रमेश
बोला, "हाँ, आज तो
ऐतिहासिक दिन है। आज
मैं नहाकर दिखाऊँगा कि इच्छाशक्ति हो
तो इंसान कुछ भी कर
सकता है।"
वह बड़े जोश में
बाथरूम में गया। नल
खोला, पानी हाथ में
लिया और तुरंत चिल्लाया,
"अरे! यह पानी इतना
ठंडा क्यों है?"
माँ
बाहर से बोली, "गीजर
चला ले।"
रमेश
ने गीजर चलाया। कुछ
देर बाद फिर आवाज
आई, "अब पानी इतना
गर्म क्यों हो गया?"
माँ
बोली, "ठंडा पानी मिलाकर
इस्तेमाल कर ले।"
रमेश
ने फिर आवाज लगाई,
"लेकिन बाल्टी में पानी कम
है!"
माँ
ने जवाब दिया, "नल
खोल ले"
कुछ
देर बाद फिर आवाज
आई, "साबुन कहाँ है?"
माँ
ने कहा, "तेरे सामने रखा
है!"
फिर
आवाज आई, "तौलिया कहाँ है?"
माँ
ने गुस्से में कहा, "दरवाजे
के पीछे!"
अंत
में लगभग 40 मिनट बाद रमेश
बाथरूम से बाहर निकला।
उसके चेहरे पर ऐसी चमक
थी जैसे उसने कोई
युद्ध जीत लिया हो।
माँ
ने पूछा, "हो गया नहाना?"
रमेश
ने गर्व से कहा,
"हाँ! आज मैंने इतिहास
रच दिया।"
माँ
ने उसे ऊपर से
नीचे तक देखा और
बोली, "लेकिन आपके बाल तो
सूखे हैं!"
रमेश
ने तुरंत जवाब दिया, "अरे,
बालों को नहलाना जरूरी
है क्या? शरीर तो साफ
हो गया!"
धनलक्ष्मी
ने माथे पर हाथ
मार लिया।
पार्टी
में खुल गया राज
शाम
को रमेश पार्टी में
पहुँचा। उसके दोस्त उसे
देखकर खुश हुए।
प्रभास
ने गले लगाते हुए
कहा, "वाह भाई! आज
तो बड़े चमक रहे
हो। लगता है बहुत
दिनों बाद नहाए हो!"
सभी
दोस्त हँसने लगे।
रमेश
ने गर्व से कहा,
"भाई, आज मैंने नहाने
के लिए पूरे 40 मिनट
दिए हैं।"
एक दोस्त ने पूछा, "तो
क्या तुमने साबुन भी लगाया?"
रमेश
बोला, "बिल्कुल!"
दूसरे
ने पूछा, "शैम्पू भी किया?"
रमेश
ने जवाब दिया, "नहीं,
आज सिर्फ शरीर की सफाई
का कार्यक्रम था। बालों की
सफाई अगले रविवार को
होगी।"
सभी
दोस्त जोर-जोर से
हँसने लगे।
तभी
प्रभास का छोटा भतीजा
शरारती अंदाज में गाते हुए
आया, "रमेश चाचू, कल
शाम आपकी माँ ने
मेरी दादी को बताया
था कि आपको नहाने
से बहुत परेशानी होती
है।"
रमेश
ने गंभीर होकर कहा, "देखो,
नहाना कोई समस्या नहीं
है। समस्या है नहाने से
पहले की तैयारी, नहाने
के दौरान की मेहनत और
नहाने के बाद तौलिया
ढूँढ़ने की परेशानी!"
प्रभास
ने हँसते हुए कहा, "तो
फिर तुम नहाते क्यों
नहीं?"
रमेश
ने बड़े दार्शनिक अंदाज
में जवाब दिया, "क्योंकि
जीवन बहुत छोटा है
दोस्त! इसे पानी में
बिताने के बजाय कुछ
अच्छे कामों में लगाना चाहिए।"
कहानी
का मजेदार अंत
अगली
सुबह रमेश बड़े आराम
से सो रहा था।
धनलक्ष्मी ने आकर कहा,
"रमेश, उठ! आज फिर
नहाना है।"
रमेश
ने आँखें बंद रखते हुए
पूछा, "क्यों? कल तो नहा
लिया था!"
धनलक्ष्मी
बोली, "वह कल था।
आज नया दिन है।"
रमेश
ने करवट बदलते हुए
कहा, "अरे माँ क्या
नहाने का भी रोजाना
रिन्यूअल कराना पड़ता है?"
माँ
ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ,
यह कोई मोबाइल रिचार्ज
नहीं है कि एक
बार करा लिया और
पूरे महीने चल जाएगा।"
रमेश
ने कुछ देर सोचा
और फिर बोला, "अच्छा,
एक काम करो। आज
मेरा नहाने का रिचार्ज अगले
महीने के लिए करवा
दो।"
धनलक्ष्मी
ने झाड़ू उठाते हुए गुस्से में
बोला, "अब तुम्हारा रिचार्ज
नहीं, तुम्हारी धुलाई होने वाली है!"
रमेश
तुरंत बिस्तर से कूदकर बाथरूम
की तरफ भागा।
उस दिन रमेश ने
रिकॉर्ड समय में स्नान
किया।
सीख:
जीवन में कुछ समस्याएँ
इतनी बड़ी नहीं होतीं,
जितना हम उन्हें अपने
बहानों से बड़ा बना
देते हैं। और कुछ
लोगों के लिए नहाना
सचमुच एक दैनिक समस्या
नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चुनौती होती है!