Mystrious Journey Of Universe
(ब्रम्हाण्ड की रहस्य्मयी सैर)
एक समय की बात है, एक बड़े शहर में एक "चंद्रमुखी" नाम की सोसाइटी थी। उस सोसाइटी में "रक्षित" नाम का
एक लड़का (उम्र= 12 साल) अपने माँ "श्रेया" और पिता "गोपीचंद" के साथ रहा करता था। "रक्षित" पांचवी कक्षा
में पढ़ा करता था और वो अपनी कक्षा का सबसे इंटेलिजेंट लड़का था। वो इतना इंटेलीजेंट था की उसके कक्षा के
सभी बच्चे उससे ईर्ष्या करते थे।
एक दिन रक्षित के कक्षा के कुछ बच्चे रक्षित के इंटेलिजेंट दिमाग को सबके नजरों में गिरा कर उसे बुद्धू साबित
करने के लिए आपस में प्लानिंग करते हैं, और उस प्लानिंग के आधार पर रक्षित को घेर लेते हैं, रक्षित बहादुरी से
उनका सामना करता है, देखते ही देखते रक्षित और उन बच्चों के बीच मारपीट शुरू हो गई।
मामला प्रिंसिपल ऑफिस में गया और दोनों पक्षों के माता-पिता को बुलाया गया। सभी बच्चों की बात सुनने के बाद
पता चला की, रक्षित को घेरने वाले बच्चों ने रक्षित को "बूली" किया था। जब प्रिंसिपल ने उनसे ऐसा करने की वजह
पूछी तब उन बच्चों ने बताया की रक्षित एक अजीब लड़का है, वो उनसब के जैसा बिलकुल नहीं है, वो क्लास में एक
रोबोट की तरह बैठा रहता है, और हर सवाल का जवाब किसी कंप्यूटर की तरह देता है।
उन्हें रक्षित से चिढ़ होती है, और उन्होंने रक्षित के अजीब व्यवहार और उसकी तेजी को निकालने के लिए उसे घेरा
था। कुछ टीचर्स ने भी उन बच्चों की बातों का समर्थन किया। स्कूल का माहौल गर्म होने की वजह से प्रिंसिपल ने
रक्षित के माता-पिता से कहा की जब तक मामला मेरे हाथ में था, हमने रक्षित को बाकी बच्चों के साथ घुलने-मिलाने
का बहुत प्रयास किया। लेकिन अब मामला दूसरे बच्चों और उनके माता-पिता के बीच आ गया है, अब मैं ज्यादा
दिन मैनेज नहीं कर पाऊंगा। हमें जल्द ही इस समस्या का उचित सामाधान ढूंढ़ना होगा।
Next Scene
:
(रक्षित के माता-पिता अपने घर घर में रक्षित के बारे में बातें करते हैं। उसके पिता बोलते हैं की हम कब तक उसे बचा
सकते हैं, रक्षित के बिहेवियर और उसके ओवर इंटेलीजेंट ब्रेन के बारे में लोग कैसे समझ पाएंगे।
उसकी माँ बोलती हैं:
माँ (श्रेया)- मुझे आज भी वो रात याद है, जब ये सब शुरू हुआ था
इसके बाद कहानी फ्लैशबैक में चली जाती है
पाँच साल पहले
पहाड़ी पर एक मंदिर के पीछे वाले जंगल के किनारे एक टेंट में गोपीचंद और श्रेया अपने छोटे से रक्षित के साथ
कैंपिंग लिए बैठे हुए हैं, ठंडी हवाएं चल रही हैं और बहुत ही सुहाना मौसम है।
श्रेया- कैसा लगा मेरा कैंपिंग का आईडिया?
गोपीचंद- हहह! तुम और तुम्हारे कैंपिंग वाले आइडियाज। अच्छा है।
गोपीचंद- (थोड़ा रुक कर,) क्या मिलता है तुम्हे ऐसी जगहों पे आ कर।
श्रेया- सुकून।
गोपीचंद- (हस्ते हुए) सुकून हाहाह ! मैं तो बिलकुल बोर हो रहा हूँ।
रक्षित- लेकिन मुझे तो बहुत मजा आ रहा है।
श्रेया - देखा, बच्चे से सीखो। नेचर के करीब आ कर, खुली हवा में सांस लेकर पहाड़ी स्पॉट का आनंद लेना,
पता नहीं तुम्हे कब आएगा?
रक्षित- मम्मा! मुझे श-शु आ रही है।
गोपीचंद- उधर झाडी के किनारे जा कर कर ले।
रक्षित- ठीक है मैं जल्दी से आता हूँ, फिर हमसब गरमागरम मैगी खाएंगे।
श्रेया- ओके, डन।
रक्षित झाड़ियों के पास जाता है, तभी अचानक !!!
झाडी के पास रक्षित को एक अनोखा पौधा मिला। उस पौधे में एक सुन्दर सा फूल खिला हुआ था। जैसे हीं रक्षित
ने फूल अपने हांथो से पकड़ कर सूंघा उसे नींद आने लगी। किसी तरह से उसने अपने नींद को तोड़ते हुए अपने
आस-पास देखा, उसे खुद की आँखों पैर यकीन नहीं हो रहा था।
उसने खुद को ब्रम्हान्ड में पाया।
वो खुद को ब्रम्हांड में पा के बहुत खुश हो गया। वो लम्बे समय तक तारों से खेलता रहा, उसने ग्रहों को अपने
आस-पास घूमते हुए देखा। उसे लग रहा था कि वो ऐन्ड्रॉमेडा, ट्रायएंगुलुम, जैसी गैलेक्सीज का गुप्त द्वार देख
सकता है, उसने आकाश गंगा को देखा, और महसूस किया कि वो कैसे अपने मिल्की वे गैलेक्सी के एक छोटे
से एक इकाई का हिस्सा है।
ये सब देख कर वो बहुत खुश था, तभी उसने देखा कि उसके पृथ्वी के तरफ एक बड़ा सा उल्का पिण्ड आ
रहा है, वो पृथ्वी को बचाना चाहता था, पर उसे ये नामुमकिन सा लग रहा था। वो जोर से चिल्लाया और उठ
कर बैठ गया। उसने खुद को पृथ्वी पर एक झाडी के पास पाया। वो हांफ रहा था। उसने पृथ्वी को बिलकुल
सुरक्षित पाया, तभी उसे ज्यादा आया कि उसकी माँ मैगी खाने के लिए उसका इंतज़ार कर रही होगी। वो
तुरंत वंहा से उठा और अपने माँ-पापा के पास गया। उसने अपने माँ-पापा को अपने साथ हुए सारी बातों
को बताया।
उसके माँ-पापा ने कहा कि, ज़रूर ही उसने कोई सपना देखा होगा। लेकिन, वो अब भी इस घटना को एक
सच मान रहा था। रक्षित और उसके माँ-पापा घर लौट आए। रक्षित अक्सर टीवी में कार्टून देखा करता था।
लेकिन, तभी उसे अचानक कुछ अंतरिक्ष से जुड़े नोटिफिकेशन आने लगे। छुप-छुप कर वो अंतरिक्ष से जुड़े
वीडियो वो बड़े ही चाव से देखा करता था। जल्द ही उसने यूनिवर्स से रिलेटेड बहुत सी जानकारियां इकट्ठी
कर ली। देखते ही देखते रक्षित का आई क्यू लेवल बहुत बढ़ चुका था।
तभी एक रात उसने सपने में उस उल्का पिण्ड को धरती से टकराने वाले दृश्य को फिर से देखा। उसने
देखा कि, वो उल्का पिण्ड धीरे-धीरे उसके नजदीक आया, उसके पास आने पर उसने पाया कि वो कोईउल्का पिण्ड नहीं बल्कि वो एक स्पेसशिप में था। संभवतः वो एक एलियन स्पेसशिप था। उस स्पेसशिप
से एक हल्की सी रौशनी आयी, धीरे-धीरे वो रौशनी तेज होती गई, और ठीक उसके बाद उसने खुद को
धरती पे पाया था, धरती पे वापस आने से पहले उसने अपने घर के छत के एक कोने को देखा था, उसे
लगा कि जैसे उस कोने में रहश्य छुपा है।
तभी उसकी नींद खुल गई, उसने वक़्त देखा तो उसे पता चला कि रात के दो बज रहे थे। वो अपने घर के
छत पर सपने में देखे हुए कोने के पास गया, जैसे ही वो वहां पहुंचा तो उसने उस कोने में वैसी ही रौशनी
को पाया। एक शक्ति जैसी ऊर्जा उस कोने से उड़ कर उसने दिमाग में गई, और फिर आसमान में उसने
उसी स्पेसशिप कि झलक को देखा। रक्षित बहुत ही घबराया हुआ सा मह्सूस कर रहा था। वो चुप चाप
अपने कमरे में जा कर सो गया।
अगली सुबह उसने अपने सपने के बारे में अपने माँ-पापा को बताया। पहले उन दोनों ने सोंचा कि रक्षित
मनगढंत कहानियां बना रहा है। लेकिन, जब उनलोगों ने उसके सीरियसनेस को देखा तो उन्होंने समझा
कि शायद रक्षित किसी मनोरोग से ग्रसित है।
रक्षित के माँ-पापा उसे एक साइकार्टिस्ट के पास ले कर गए, वहां जा कर रक्षित ने सबकुछ उस डॉक्टर
को बताया, डॉक्टर ने बताया कि रक्षित हैलोसिनेसन से ग्रसित है, और वो जो कुछ भी कल्पना करता है,
उसे वो सच मानाने लगता है। उस डॉक्टर ने कुछ दवाइयां लिखी और वक़्त के साथ रक्षित ठीक होता गया।
प्रेजेंट टाइम
सीन वापस वही पहुँच जाता है जब रक्षित के माता-पिता घर के कमरे में बैठ कर पांच साल
पहले कि इन बातों को याद कर रहे थे।
To Be Continued..
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