कॉलेज का सीन
रक्षित के कॉलेज का पहला दिन था। रक्षित बहुत ही घबराया हुआ था, क्योंकि उसे कॉलेज के बारे में बिलकुल भी आईडिया नहीं था। उसे उसके भैया मोटरसाइकल पर कॉलेज ले कर गए थे। चुकी ये कॉलेज का पहला दिन था तो स्टूडेंट के साथ पेरेंट्स को भी कॉलेज में बुलाया गया था ताकि पेरेंट्स, टीचर्स और स्टूडेंट्स एक दूसरे को अच्छे से समझ सकें।
कॉलेज के गेट के भीतर रक्षित अपने भैया के मोटरसाइकल पे पीछे बैठे उनके साथ एंट्री करता है। उसके मोटरसाइकल के ठीक पहले एक कार अंदर जाती है। जहां वो कार रूकती है ठीक उसके बगल में रक्षित की मोटरसाइकल रूकती है। इधर रक्षित और उसके भैया मोटइरसाईकल से उतरते हैं और ठीक उसी वक़्त उस कार से एक फॅमिली उतरती है, जिसमें एक लड़की, और उसके माता - पिता होते हैं।
रक्षित और उसके भैया वहां से निकल कर नोटिस बोर्ड की तरफ जाते हैं जहाँ उन्हें पता चलता है की उनकी टीचर्स के साथ मुलाकात किस क्लास्सरूम में होगी। वो वहां से सीधा क्लासरूम में पहुँचते हैं। उसी दौरान वो कार से उतरी हुई फॅमिली भी वहां पहुँचती है। रक्षित क्लासरूम के अंदर पहले जाता है, तभी उसके ठीक पीछे उस फॅमिली के साथ आई हुई लड़की भी वहां पहुँच जाती है। वो लड़की रक्षित से पूछती है की क्या ये अंग्रेजी की क्लास है ?
चुकी रक्षित पहले से घबराया हुआ होता है इसीलिए वो कुछ भी नहीं बोल पाता है। तभी उसके भैया वहां आ कर कन्फर्म करते हैं की हां वो अंग्रेजी की ही क्लास है। इतने में उस लड़की के माता पिता वहां पहुँच जाते हैं और रक्षित के भैया से पूछते हैं की क्या वो फर्स्ट ईयर के लिए वहां आए हैं। रक्षित के भैया को ऐसा लगता है की शायद वो उसे भी स्टूडेंट समझ रहे हैं इसीलिए वो उन्हें रक्षित की तरह इशारा करते हुए बोलते हैं की वो स्टूडेंट है और मैं उसे यहाँ लेकर आया हूँ। कृपया वो उससे पूछें।
तभी रक्षित की नजर एक और लड़के पर पड़ती है, जो की उनके बाद में आकर बड़े ही तेजी पुरे क्लास को एक्स्प्लोर कर रहा होता है।
थोड़ी देर बाद, टीचर्स क्लास में आ जाते हैं। और सारे टीचर्स, पेरेंट्स और स्टूडेंट्स एक दूसरे से मिलना और बातें करना शुरू कर देते हैं।
सारे वक़्त रक्षित के भैया की नजर उस लड़की पर रहती है, जो की कार से लेकर क्लास तक उनके साथ थी। वो ऑब्ज़र्व कर रहे थे की वो लड़की कितनी फ़ास्ट है, और कितने तेजी से सारे ज़रूरी सवाल टीचर्स से पूछ पा रही है जबकि उसका भाई एक शब्द भी नहीं बोल पा रहा है।
अंत में मीटिंग ख़तम होती है और सब अपने घर लौट जाते हैं।
रक्षित के कमरे का सीन।
रक्षित और उसके भैया बातें कर रहे होते हैं।
रक्षित के भैया रक्षित को समझाते हैं की वो थोड़ा फ़ास्ट बने। और उन्होंने रक्षित को सलाह दी की अच्छा रहेगा की वो उस लड़की से दोस्ती कर ले ताकि वो उस लड़की से कुछ सीख सके।
रक्षित रेगुलर कॉलेज अटेंड करना शुरू कर देता है। वो हर रोज सारे वक़्त उस लड़की को तलाशते रहता है, लेकिन वो उसे ढूंढने में नाकामयाब रहता है।
एक दिन वो अपने क्लास में चुपचाप बैठा रहता है तभी उसके कुछ क्लासमेट्स उससे उसकी चुप्पी का कारण पूछते हैं। वो फिर भी खामोश ही रहता है। फिर वो अलग-अलग तरीकों से उसे उसकी चुप्पी तोड़वाने का प्रयास करते हैं। जब कोई भी तरीका काम नहीं करता है तब वो उसकी चुप्पी तोड़ने के लिए लड़कियों का सहारा लेते हैं।
वो रक्षित से पूछते हैं की बोलो तुम्हे किस लड़की से बात करनी है, तुम जिससे कहोगे उससे बात करवा देंगे तुरंत। रक्षित कहता है की उसे किसी भी लड़की से बात नहीं करनी है। वो उसे फ़ोर्स करते हैं की किसी भी लड़की के तरफ उंगली दिखा दो वो उसी से बात करा देंगे। जब वो नहीं माने तब मजबूरन रक्षित को एक लड़की के तरफ ऊँगली दिखानी पड़ी।
जिस लड़की के तरफ उसने इशारा किया था उसके पास उसके दोस्त उसे लेकर गए।
उसे उसके ठीक पीछे के बेंच पर बैठाया गया। फिर उसके दोस्तों ने उस लड़की से कहा की ये तुमसे बात करेगा।
जब उस लड़की ने अपना मुँह रक्षित के तरफ किया तो रक्षित चौंक गया। ये वही लड़की थी जिसे वो इतने दिनों से ढूंढ रहा था। उसे देखते ही रक्षित की पहले दिन वाली घबराहट फिर से शुरू हो गई। लेकिन उस लड़की ने सीधा सवाल किया, हाँ बोलो, क्या बोलना है?
डरते हुए, रक्षित ने कहा मेरे दोस्त चाहते हैं की मैं तुमसे बात करूँ।
उसने कहा - तो तुम बात करना नहीं चाहते।
रक्षित- मैं भी चाहता हूँ।
लड़की- तो कहो, क्या कहना है ?
रक्षित- (उसके तरफ हाथ बढ़ाते हुए ) हाय! मैं रक्षित ( ऐसा बोलते वक़्त रक्षित बुरी तरह काँप रहा था।)
लड़की- थोड़ा रुक कर और हसते हुए, कितना काँप रहे हो तुम)- फिर उसने भी बढ़ाया और हाथ मिलाते हुए बोली, मैं लुकारा।
फिर रक्षित ने थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए कहा- मैं इस वक़्त ज्यादा बात नहीं कर पाऊंगा। एक काम करो, मुझे अपना नंबर दे दो। मैं तुन्हे कॉल करूँगा।
ये देख कर लुकारा के साथ बैठी लडकियां हसते हुए बोली। कितना फ़ास्ट है ये तो। अभी काँप रहा था और अभी नंबर भी मांग रहा है। इतने में लुकारा बोली- कोई बात नहीं लाओ अपना मोबाइल मैं उसने अपना नंबर फीड कर देती हूँ।
और इस तरह से रक्षित और लुकारा की दोस्ती हुई।
रक्षित ने रूम वापस आ कर शाम में अपने भैया को बताया की उसने उसी लड़की से दोस्ती कर ली है जिससे करने के लिए उसने कहा था। उसके भैया ने कहा, विश्वास नहीं होता।
ठीक है, अब पढ़ाई पे ध्यान दो। बस दोस्ती कर लिए, अच्छी बात है लेकिन, ज्यादा उधर ध्यान मत देना। जितना जरूरत हो उतना ही बात करना।
रक्षित जब भी उससे बात करना चाहता, वो उसे जल्दी जवाब नहीं देती। ना तो क्लास में और ना ही व्हाट्सऐप चैट पर। रक्षित ने उसके साथ कुछ टाइम स्पेंट करने का फैसला किया। फिर एक दिन वो उसे कॉलेज के कैफेटेरिया में कॉफी के लिए उससे पूछा। लेकिन उसने मना कर दिया।
ये बात पूरे कॉलेज में आग की तरह फ़ैल गई की रक्षित ने लुकारा को कैफेटेरिया में कॉफ़ी के लिए पूछा था। इस बात की पुस्टि करने के लिए उसका एक मित्र "रितेश" उससे व्हाट्सऐप चैट पर उससे पूछता है की उसने लुकारा के साथ क्या किया। रक्षित ये जानने का प्रयास करता है की उसे इस बारे क्या जानकारी मिली है और लोगों के बीच क्या कहानियां फैली हुई हैं।
लेकिन वो भी सीधी बात ना बता कर बातों को घुमाता फिराता है। उसी वक़्त रितेश क्लास के ग्रुप में किसी दूसरे विषय को लेकर एक पोस्ट शेयर करता है जिसमें रक्षित को कुछ गलतियां नजर आती है और उस गलती पर दोनों के बीच पर्सनल चैट के साथ-साथ ग्रुप में भी बातें शुरू हो जाती है। पर्सनल चैट में लुकारा, और ग्रुप चैट में उस विषय पर रितेश की गलती, इनदोनो बातों पर एक लम्बी चर्चा होने के कारण रितेश ने बात को ख़तम करने का आग्रह किया।
चुकी, रक्षित को लुकारा के बारे में जानना ज़रूरी लग रहा था की लोगों के बीच उसके और लुकारा को लेकर क्या बातें चल रही हैं, इसीलिए वो इस बात को ख़तम नहीं करना चाहता था। यहीं सोंच कर रक्षित ने एक आखिरी बार कहा की, ठीक है इस गलती के बारे में बात बंद करते हैं लेकिन लुकारा की बात को कंटिन्यू करते हैं।
रक्षित इस बात को पर्सनल चैट में लिखना चाहता था लेकिन भूल वश कंफ्यूज हो कर उसने ये मैसेज ग्रुप चैट में भेज दिया। हालांकि उसने इस बात के लिए ग्रुप में माफ़ी मांगी। लेकिन ये बात लुकारा तक पहुँच गई। और अगले ही दिन लुकारा ने इस बात के लिए रक्षित को दोषी करार दिया और उसे एक थप्पड़ भी जड़ दिया।
जब रक्षित ने सबकुछ खुल कर एक्सप्लेन किया तो, तब लुकारा ने उसे एक टुक्क कहा की "मुझे नहीं पता की क्या हुआ, लेकिन ये सबकुछ अभी बंद करो और मुझसे दुबारा कभी बात करने की कोशिश भी मत करना।
ये रक्षित और लुकारा की आखिरी मुलाकात थी। वो रोज एक दूसरे को देखते पर बात नहीं कर पाते। रक्षित क्लास में फर्स्ट बेंच पर बैठता था और लुकारा बगल वाले रॉ में लास्ट बेंच पर बैठती थी। रक्षित से ज्यादा लोग बात नहीं करते थे इसिलए रक्षित हमेशा अपने बेंच पर चुपचाप बैठा रहता था, लेकिन लुकारा, रक्षित के मुकाबले ज्यादा एक्टिव थी। वो हर रोज, रक्षित के सामने से गुजर जाती थी, और रक्षित बस देखता रह जाता था।
दिन बीते, महीने बीते, पर कोई बात नहीं हुई, सबकुछ वैसा ही चलता रहा। तभी एक दिन उनकी कहानी में एक मोड़ आया, कॉलेज के तरफ से उन्हें एक सेलिब्रिटी शो में वोल्युइंटेरिंग का ऑफर आया। उस में क्लास के बहुत सारे सूडेन्ट्स जा रहे थे, संजोग से रक्षित और लुकारा ने भी अपना नाम दिया। सब उस शो को लेकर, दो दिनों के लिए उस "शो डेस्टिनेशन" पर एक साथ रुके।
उस डेस्टिनेशन पर ठहरने से पहले उन्हें उन सलेब्रिटीज, जिनके लिए वो शो होस्ट किया जा रहा था, उन सेलिब्रिटीज को प्रोमोट करना था। प्रोमोशन के सिलसिले में सबने एक ग्रुप क्रिएट किया। और वहां ये तय हुआ की प्रोमोशन के लिए किसको कहाँ जाना है।
उस डिवीज़न में रक्षित और लुकारा को एक ही जगह एक साथ एक ग्रुप में जाना था। वो चार लोगों का ग्रुप था जिसमें रक्षित और लुकारा के अलावा दो और लोग मौजूद थे, भास्कर और मोहिनी। चुकी, मोहिनी ने कहा था की वो वहां पहले ही पहुँच जाएगी। इसीलिए रक्षित, लुकारा, और भास्कर को एक साथ उस प्रोमोशन के स्थान पर पहुंचना था। वहां पहुँचने के लिए उनलोगों ने तय किया की वो सब लुकारा की कार से एक साथ जाएंगे।
इस बारे में लुकारा ने अपने घर पे बात कर ली, और उसकी माँ ने उन्हें अपनी कार में साथ जाने की इजाजत दे दी। वो सब लुकारा की कार में बैठ कर प्रोमोशन के स्थान पर पहुंचे। जब वो वहां पहुंचे तो उनलोगों ने मोहिनी की तलाश शुरू की। उनलोगों ने पाया की मोहिनी वहां एक बेंच पर अपने बॉयफ्रेंड के साथ बैठी हुई है।
वो भी वहां पहुंचे और मोहिनी ने उन्हें अपने बॉयफ्रेंड जनक से मिलाया। फिर सब ये बातें करने लगे की उन्हें प्रोमोशन कैसे करना है। सब ने अपने अलग अलग तरीके बताए। फिर उनलोगों ये तय किया की हमसब अलग अलग दिशा में निकल जाते हैं, और जो भी मिले उसे अपने-अपने तरीके से शो के बारे में एक्सप्लेन कर के उन्हें शो की प्रमोशन पर्ची देंगे। फिर सब अपने काम में लग गए।
लुकारा ने सबसे पहले कहा की वो प्रोमोट करने की कोशिश करने जा रही है, और वो अकेली निकल गई। थोड़ी देर बाद उसने भास्कर को इशारा किया और वो भी ये बोल कर निकल गया, की वो सुन कर आ रहा है की वो क्या कह रही है। फिर मोहिनी, और जनक एक दूसरे से बातें करने लगे और रक्षित बोर महसूस करने लगा। थोड़ी देर बाद रक्षित ने भी कहा "यू गाइस कैरी ऑन" मैं भी थोड़ा प्रमोशन कर के आता हूँ।
फिर रक्षित भी निकला, और कुछ प्रोमोशंस किये। प्रोमोशन करने के दौरान बीच-बीच में वो अपने साथियों को भी देख लेता, की वो क्या कर रहे हैं। तभी उसने पाया की भास्कर और लुकारा, मोहिनी और जनक के पास पहुँचते हैं, और फिर लुकारा उनसे पूछती है की रक्षित कहाँ है। तब मोहिनी ने उसे बताया की रक्षित प्रोमोशन के लिए आस पास ही गया है। फिर लुकारा ने क्रॉस कवेश्चन किया की "वो अकेला क्यों गया, तुमलोग उसके साथ क्यों नहीं गए।
इतने में रक्षित वहां पहुँच जाता है। और कहता है की उसने एक दो प्रोमोशंस किये हैं। फिर, रक्षित, लुकारा, और जनक एक साथ प्रमोशन के लिए दोबारा निकल जाते हैं। एक दो प्रोमोशन और करने के बाद उन्हें कुछ खाने का मन करता है। फिर वो सब आइसक्रीम खाते हैं। उसके बाद रक्षित, लुकारा को जूतियां खरीदने में मदद करता है। फिर वो सब वहां से जाने के लिए निकलते हैं।
रक्षित वहां से पहले ही निकल जाता है क्योंकि वहां से उसका घर नजदीक पड़ता है। उसके बाद वो सब वहां से निकल जाते हैं।
आख़िरकार वो दिन आ ही गया जब सब को एक साथ उस डेस्टिनेशन पर ठहरना था, और वो सब ठहरे भी। वहां पर उनसब ने बहोत सारी एक्टिविटीज की और बहुत कुछ सीखा भी। उस दौरान रक्षित ने एक दो बार किसी काम के बहाने लुकारा से बात भी की। वही पर एक शाम रक्षित अकेले बैठ कर कुछ गाने गुनगुना रहा था। तभी वहां उसके पास एक दूसरी लड़की "ईशा" आई, जो की वहां आ कर उससे फिल्मों के बारे में बातें करने लगी। उस लड़की ने उससे कहा की उसे फिल्मों में बहुत ही इंटरेस्ट है। थोड़ी देर बाद ईशा का पीछा करते हुए उसका बॉयफ्रेंड "अभिनाश " वहां पहुंचा और वो उसे अपने साथ लेकर चला गया।
उस रात ईशा रक्षित के पास दुबारा आई, और उसने रक्षित को बाहर साथ में आइसक्रीम के लिए पूछा। दोनों वहां जाने ही वाले थे की तभी अभिनाश का फ़ोन ईशा के पास आया और उसे आइसक्रीम का प्लान कैंसिल करना पड़ा। लेकिन उसने रक्षित को कहा की वो एक मिनट में रक्षित को एक्टिंग की एक झलक दिखला सकती है की फिल्म मेकर्स कैसे सीन क्रिएट करते हैं। फिर वो रक्षित को एक पेड़ के पीछे ले कर गई और उसने कहा की तुम चुपचाप खड़े रहना।
फिर उसने कहा, वहां से सबने हमें यहाँ पेड़ के पीछे आते हुए देखा, अब मैं अपना दुपट्टा लहराऊंगी और अपने कुछ कपडे आगे पीछे करूंगी। और अंत में अपना बाल पेड़ के एक तरफ दो तीन बार ऊपर से लेकर नीचे तक बाहर के तरफ फेकूँगी।फिर मैं चली जाउंगी, और फिर थोड़ी देर बाद तुम भी निकल कर चले जाना। फिर दोनों ने वैसा ही किया जैसा की ईशा ने कहा था।
जब सब अंदर थे, तभी थोड़ी देर के लिए लाइट कट जाती है। उसी दौरान अँधेरे में मोहिनी, रक्षित का नाम लेकर पूछती है की रक्षित कहाँ है, उसे उसने आख़िरी बार ईशा के साथ जाते हुए देखा था। तभी लाइट वापस आ जाती है, और रक्षित को वही खड़े देख कर मोहिनी ने कहा अरे रक्षित तू यहाँ है, मैं सोंची तू कहाँ चला गया।
फाइनली वो शो अच्छे से होस्ट हो गया। वहां सारे एक्टर, एक्ट्रेस आए। सबने उनके साथ फोटोज भी क्लिक करवाई। और अंत में सब वापस अपने घर को लौट गए।
जब, सब वापस अगले दिन कॉलेज आए तब सबकुछ बिलकुल पहले ही की तरह था। सब अपने-अपने काम में व्यस्त थे। रक्षित उसी तरह अपने बेंच पर अकेला बैठा रहता। लुकारा रोज उसके सामने से निकल जाती। उसके बाद रक्षित और लुकारा ने कभी भी बात नहीं की।
उसके बाद रक्षित के लाइफ में कुछ नए दोस्त आए। रक्षित ने उनलोगों का एक व्हाटसऐप ग्रुप क्रिएट किया जो की ज्यादातर आते जाते उससे बातें करते रहते थे। उस ग्रुप के माध्यम से वो सब बातें करते-करते एक अच्छे दोस्त बन गए। फिर वो सब एक साथ बैठने लगे। क्लास में पढ़ाई, और डिकशन भी करने लगे। वो ग्रुप बहुत ही अच्छा चला और फिर वो सब पढ़ लिख कर अच्छे नंबर से उस कॉलेज से पास आउट हो कर निकल गए।
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